Fake Medical Report | हाटा सीएचसी में फर्जी जांच रिपोर्ट
Fake Medical Report | स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
हाटा, कुशीनगर।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हाटा एक बार फिर विवादों में है।
यहां मरीजों को जांच के नाम पर गलत रिपोर्ट देने का आरोप लगा है।
इससे इलाज पर सीधा असर पड़ रहा है।
मरीजों और परिजनों में डर है।
वे कह रहे हैं कि रिपोर्ट सही नहीं होती।
गलत रिपोर्ट से गलत दवा दी जा रही है।
इससे बीमारी बढ़ने का खतरा है।
मरीज का मामला बना चर्चा का विषय | Fake Medical Report
सूत्रों के अनुसार, वार्ड संख्या 16 सरोजिनी नगर निवासी सुशीला देवी का मामला सामने आया है।
उन्होंने 23 मार्च 2026 को हाटा सीएचसी में जांच कराई थी।
रिपोर्ट में किडनी जांच का स्तर 2.1 बताया गया।
रिपोर्ट देखकर परिवार घबरा गया।
परिजन तुरंत गोरखपुर के एक निजी चिकित्सक के पास पहुंचे।
वहां दोबारा जांच कराई गई।
नई रिपोर्ट पूरी तरह सामान्य आई।
इससे परिजनों में आक्रोश है।
परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप | Fake Medical Report
परिजनों का कहना है कि जानबूझकर गलत रिपोर्ट दी जाती है।
ताकि महंगी दवाएं लिखी जा सकें।
उन्होंने आरोप लगाया:
- बिना सही जांच के रिपोर्ट बनाई जाती है
- मरीजों को डराकर दवा लिखी जाती है
- गरीब लोगों को निशाना बनाया जाता है
- जेब पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है
स्वास्थ्य केंद्र की कार्यप्रणाली पर सवाल | Fake Medical Report
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहला मामला नहीं है।
पहले भी ऐसी शिकायतें सामने आ चुकी हैं।
लोगों का भरोसा कमजोर हो रहा है।
यदि यह जारी रहा, तो सरकारी अस्पतालों पर विश्वास खत्म हो सकता है।
शिकायत दर्ज, जांच की मांग | Fake Medical Report
इस मामले की शिकायत जन शिकायत प्रणाली के माध्यम से की गई है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| शिकायत माध्यम | जन शिकायत प्रणाली |
| शिकायत संख्या | 40018926007780 |
| तिथि | 23 मार्च 2026 |
| स्थान | हाटा सीएचसी |
लोगों ने उठाई सख्त कार्रवाई की मांग | Fake Medical Report
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से जांच की मांग की है।
उन्होंने कहा कि दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।
एक स्थानीय निवासी ने कहा:
“अगर समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो आम जनता का भरोसा खत्म हो जाएगा।”

अधिकारियों का आश्वासन
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मामले को गंभीर बताया है।
उन्होंने जांच का आश्वासन दिया है।
अधिकारियों का कहना है कि दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी।
गरीब मरीजों पर सबसे ज्यादा असर
इस तरह के मामलों में सबसे ज्यादा नुकसान गरीबों का होता है।
वे सरकारी अस्पतालों पर निर्भर रहते हैं।
गलत रिपोर्ट से:
- बीमारी बढ़ती है
- पैसा खर्च होता है
- मानसिक तनाव बढ़ता है
हाटा सीएचसी का यह मामला स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी खामी को दिखाता है।
यदि जल्द सुधार नहीं हुआ, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
जनता अब जवाब चाहती है।
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