Family Participatory Care | घर लौटने के बाद भी सुरक्षित रहेंगे नवजात, एसएनसीयू में माताओं को मिल रही विशेष ट्रेनिंग
परिवार की भागीदारी से बदल रही नवजात देखभाल की तस्वीर | Family Participatory Care
छपरा: समय से पहले जन्म लेने वाले, कम वजन वाले और बीमार नवजात शिशुओं की देखभाल को और बेहतर बनाने के लिए सदर अस्पताल छपरा की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में परिवार सहभागिता आधारित देखभाल मॉडल को प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। इस पहल के तहत माताओं और परिवार के अन्य सदस्यों को नवजात की देखभाल का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल में इलाज के साथ-साथ घर लौटने के बाद भी नवजात की सही देखभाल बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से परिवारों को प्रशिक्षित कर उन्हें नवजात देखभाल में सक्रिय भागीदार बनाया जा रहा है।
क्या है परिवार सहभागिता आधारित देखभाल? | Family Participatory Care
परिवार सहभागिता आधारित देखभाल एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें नवजात शिशु की देखभाल केवल चिकित्सकों और नर्सों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि माता-पिता और परिवार के सदस्य भी इसमें सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
इस मॉडल का मुख्य उद्देश्य परिवार को इतना सक्षम बनाना है कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी शिशु को गुणवत्तापूर्ण देखभाल मिलती रहे।
कंगारू मदर केयर से मिल रही नई उम्मीद | Family Participatory Care
इस मॉडल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा कंगारू मदर केयर है।
इस प्रक्रिया में मां या परिवार का कोई सदस्य नवजात को अपनी छाती से सटाकर रखता है। इससे बच्चे को प्राकृतिक गर्माहट मिलती है। साथ ही भावनात्मक जुड़ाव भी मजबूत होता है।
कम वजन वाले और समय से पहले जन्मे बच्चों के लिए यह तरीका बेहद लाभकारी माना जाता है।
माताओं को सिखाई जा रही जरूरी तकनीकें | Family Participatory Care
एसएनसीयू में प्रशिक्षित नर्सें और चिकित्सक माताओं को कई महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण दे रहे हैं।
प्रशिक्षण में शामिल प्रमुख विषय
- सही तरीके से स्तनपान कराना
- नवजात को सुरक्षित ढंग से गोद में रखना
- शरीर का तापमान मापना
- हाथों की स्वच्छता बनाए रखना
- संक्रमण से बचाव
- खतरे के संकेतों की पहचान करना
- घर पर सुरक्षित देखभाल सुनिश्चित करना
अभिभावकों का बढ़ रहा आत्मविश्वास | Family Participatory Care
विशेषज्ञों के अनुसार इस मॉडल से माता-पिता बच्चे की बीमारी और उपचार प्रक्रिया को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं।
बच्चे के साथ अधिक समय बिताने से उनका आत्मविश्वास बढ़ता है। तनाव और चिंता में भी कमी आती है।
“जब माता-पिता को अस्पताल में ही प्रशिक्षण मिल जाता है तो वे घर जाकर भी बच्चे की बेहतर देखभाल कर पाते हैं। इससे संक्रमण का खतरा कम होता है और नवजात के स्वस्थ विकास में मदद मिलती है।” — डॉ. संदीप यादव, शिशु रोग विशेषज्ञ
एसएनसीयू टीम की विशेष पहल | Family Participatory Care
एसएनसीयू प्रभारी ज्योति आइजक के अनुसार अस्पताल की टीम नियमित रूप से माताओं को प्रशिक्षण देती है।
“विशेष रूप से कंगारू मदर केयर, स्तनपान और संक्रमण से बचाव पर जोर दिया जाता है। इससे परिवारों का आत्मविश्वास बढ़ा है और नवजातों की रिकवरी में सकारात्मक परिणाम मिले हैं।”
शोध में भी मिले सकारात्मक परिणाम | Family Participatory Care
विभिन्न अध्ययनों में परिवार सहभागिता आधारित देखभाल मॉडल को प्रभावी पाया गया है। शोध के अनुसार इससे नवजात देखभाल की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और परिवारों की भागीदारी भी बढ़ी है।
रिसर्च क्या कहती है? | Family Participatory Care
| प्रमुख निष्कर्ष | परिणाम |
|---|---|
| एसएनसीयू केंद्रों में नियमित प्रशिक्षण सत्र | 95% |
| प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली माताएं | 97.3% |
| केवल स्तनपान कराने वाली माताएं | 93.3% |
| कंगारू मदर केयर अपनाने वाले परिवार | 93.2% |
| गुणवत्ता में सुधार मानने वाले स्वास्थ्यकर्मी | 97% |
| बेहतर जीवित रहने की संभावना | अध्ययन में सकारात्मक परिणाम |
नवजात मृत्यु दर कम करने में अहम कदम | Family Participatory Care
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जैसे देश में जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में कम वजन और समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चे पैदा होते हैं, वहां परिवार सहभागिता आधारित देखभाल मॉडल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
यह मॉडल न केवल नवजात मृत्यु दर कम करने में सहायक है बल्कि शिशुओं के समग्र स्वास्थ्य और विकास को भी बेहतर बनाने की दिशा में एक मजबूत पहल माना जा रहा है।
सदर अस्पताल छपरा की यह पहल नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दे रही है। परिवारों को प्रशिक्षण देकर नवजात की देखभाल में शामिल करना अस्पताल से घर तक सुरक्षित स्वास्थ्य यात्रा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।


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