Gyan Bharatam Mission Manuscript Discovery | सुपौल में मिली सौ वर्ष पुरानी धरोहर
ज्ञान भारतम् मिशन से बढ़ी खोज की रफ्तार | Gyan Bharatam Mission Manuscript Discovery
सुपौल। जिले में अपनी ऐतिहासिक जड़ों को संजोने की दिशा में बड़ा कदम उठा है। राष्ट्रव्यापी ज्ञान भारतम् मिशन के तहत दुर्लभ पांडुलिपियों की खोज जारी है। इसी क्रम में प्रखंड छातापुर के सदगुरु कबीर मठ, हरिहरपुर से सौ वर्ष से अधिक पुरानी पांडुलिपि मिली है। यह खोज क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है।
ज्ञान विवेक: अमूल्य पांडुलिपि का परिचय | Gyan Bharatam Mission Manuscript Discovery
यह पांडुलिपि मठाधीश हरि शरण गोस्वामी के संरक्षण में प्राप्त हुई। इसे मठ के एक महात्मा ने स्वयं लिखा था।
मुख्य विवरण:
- नाम: ज्ञान विवेक
- विषय: संत कबीर के दोहे और चौपाइयां
- लिपि: देवनागरी
- विशेषता: सुंदर और स्पष्ट लेखन शैली
प्रशासन का बयान | Gyan Bharatam Mission Manuscript Discovery
“ये पांडुलिपियां महज कागज नहीं हैं। ये हमारी सभ्यता की पहचान हैं। इन्हें बचाना जरूरी है।”
— सावन कुमार, जिला पदाधिकारी, सुपौल
सांस्कृतिक केंद्र बनने की दिशा में सुपौल | Gyan Bharatam Mission Manuscript Discovery
जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी तारकेश्वर पटेल ने कहा कि यह पहल केवल संरक्षण तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य सुपौल को सांस्कृतिक ज्ञान का प्रमुख केंद्र बनाना है।
मुख्य पहल और प्रयास | Gyan Bharatam Mission Manuscript Discovery
- संरक्षण कार्य: पांडुलिपियों का भौतिक संरक्षण
- डिजिटलीकरण: डिजिटल रूप में सुरक्षित रखने की योजना
- जनभागीदारी: ग्रामीणों का सहयोग
- अपील: लोगों से प्राचीन ग्रंथ साझा करने का आग्रह
मिशन की प्रमुख जानकारी | Gyan Bharatam Mission Manuscript Discovery
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| मिशन | ज्ञान भारतम् मिशन |
| स्थान | हरिहरपुर, छातापुर |
| खोज | ज्ञान विवेक पांडुलिपि |
| आयु | 100 वर्ष से अधिक |
| विषय | संत कबीर साहित्य |
यह खोज बताती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी ज्ञान का भंडार छिपा है। ज्ञान भारतम् मिशन के माध्यम से सुपौल अपनी सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित कर रहा है। यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी।



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