JEEViKA Zero Office Day Darbhanga | दरभंगा में जीविका का जीरो ऑफिस डे, गांव-गांव पहुंचकर योजनाओं की जांच
ग्रामीण महिलाओं की आजीविका, बचत और ऋण गतिविधियों की हुई व्यापक समीक्षा

दरभंगा में दो दिवसीय विशेष अभियान | JEEViKA Zero Office Day Darbhanga
दरभंगा जिले में जीविका द्वारा जीरो ऑफिस डे के तहत दो दिवसीय विशेष अभियान चलाया गया। इसका उद्देश्य सामुदायिक संस्थाओं को मजबूत बनाना और योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन का आकलन करना था।
जिला परियोजना प्रबंधक डॉ. ऋचा गार्गी के नेतृत्व में सभी प्रखंडों के अधिकारी और कर्मी कार्यालय से बाहर निकलकर गांवों और पंचायतों में पहुंचे।
समूह बैठकों में पहुंचे अधिकारी | JEEViKA Zero Office Day Darbhanga
अधिकारियों ने स्वयं सहायता समूह, ग्राम संगठन और संकुल स्तरीय संघ की बैठकों में भाग लिया।
इस दौरान उन्होंने:
- बैठकों की नियमितता देखी
- निर्णय प्रक्रिया का अवलोकन किया
- वित्तीय प्रबंधन की समीक्षा की
- अभिलेखों का निरीक्षण किया
महिलाओं से सीधा संवाद | JEEViKA Zero Office Day Darbhanga
जीविका दीदियों से कृषि, पशुपालन, स्वरोजगार, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और सूक्ष्म उद्यमों की जानकारी ली गई।
अधिकारियों ने महिलाओं द्वारा अपनाए गए नवाचारों और सफल मॉडलों का भी अवलोकन किया।
चुनौतियों पर भी हुई चर्चा | JEEViKA Zero Office Day Darbhanga
“जीरो ऑफिस डे का उद्देश्य केवल निरीक्षण नहीं, बल्कि समुदाय की वास्तविक जरूरतों को समझना है।”
— डॉ. ऋचा गार्गी, जिला परियोजना प्रबंधक
उन्होंने कहा कि क्षेत्र में जाकर मिलने वाला अनुभव अधिक व्यावहारिक और उपयोगी होता है। इससे समस्याओं की पहचान समय पर हो जाती है।
संचार प्रबंधक ने क्या कहा?
संचार प्रबंधक राजा सागर ने बताया कि क्षेत्र भ्रमण से योजनाओं की वास्तविक स्थिति का पता चलता है।
उन्होंने कहा कि सफल प्रयासों का दस्तावेजीकरण किया जाता है और जहां कमी मिलती है, वहां सुधारात्मक कार्रवाई की जाती है।
दरभंगा में जीविका की स्थिति | JEEViKA Zero Office Day Darbhanga
जिले में सक्रिय संस्थाएं
| संस्था | संख्या |
|---|---|
| स्वयं सहायता समूह | 44,290 |
| ग्राम संगठन | 3,200 |
| संकुल स्तरीय संघ | 69 |
| जुड़ी जीविका दीदियाँ | लगभग 6 लाख |
ग्रामीण महिलाओं के लिए बनी ताकत | JEEViKA Zero Office Day Darbhanga
ये संस्थाएं महिलाओं को बचत, ऋण, स्वरोजगार, कृषि, पशुपालन और सरकारी योजनाओं से जोड़ रही हैं।
जीविका के माध्यम से हजारों महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं और गांवों में सामाजिक परिवर्तन की नई मिसाल पेश कर रही हैं।
दरभंगा में जीविका का जीरो ऑफिस डे, गांव-गांव पहुंचकर योजनाओं की जांच
ग्रामीण महिलाओं की आजीविका, बचत और ऋण गतिविधियों की हुई व्यापक समीक्षा
दरभंगा में दो दिवसीय विशेष अभियान | JEEViKA Zero Office Day Darbhanga
दरभंगा जिले में जीविका द्वारा जीरो ऑफिस डे के तहत दो दिवसीय विशेष अभियान चलाया गया। इसका उद्देश्य सामुदायिक संस्थाओं को मजबूत बनाना और योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन का आकलन करना था।
जिला परियोजना प्रबंधक डॉ. ऋचा गार्गी के नेतृत्व में सभी प्रखंडों के अधिकारी और कर्मी कार्यालय से बाहर निकलकर गांवों और पंचायतों में पहुंचे।
समूह बैठकों में पहुंचे अधिकारी
अधिकारियों ने स्वयं सहायता समूह, ग्राम संगठन और संकुल स्तरीय संघ की बैठकों में भाग लिया।
इस दौरान उन्होंने:
- बैठकों की नियमितता देखी
- निर्णय प्रक्रिया का अवलोकन किया
- वित्तीय प्रबंधन की समीक्षा की
- अभिलेखों का निरीक्षण किया
महिलाओं से सीधा संवाद | JEEViKA Zero Office Day Darbhanga
जीविका दीदियों से कृषि, पशुपालन, स्वरोजगार, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और सूक्ष्म उद्यमों की जानकारी ली गई।
अधिकारियों ने महिलाओं द्वारा अपनाए गए नवाचारों और सफल मॉडलों का भी अवलोकन किया।
चुनौतियों पर भी हुई चर्चा
“जीरो ऑफिस डे का उद्देश्य केवल निरीक्षण नहीं, बल्कि समुदाय की वास्तविक जरूरतों को समझना है।”
— डॉ. ऋचा गार्गी, जिला परियोजना प्रबंधक
उन्होंने कहा कि क्षेत्र में जाकर मिलने वाला अनुभव अधिक व्यावहारिक और उपयोगी होता है। इससे समस्याओं की पहचान समय पर हो जाती है।
संचार प्रबंधक ने क्या कहा? | JEEViKA Zero Office Day Darbhanga
संचार प्रबंधक राजा सागर ने बताया कि क्षेत्र भ्रमण से योजनाओं की वास्तविक स्थिति का पता चलता है।
उन्होंने कहा कि सफल प्रयासों का दस्तावेजीकरण किया जाता है और जहां कमी मिलती है, वहां सुधारात्मक कार्रवाई की जाती है।
दरभंगा में जीविका की स्थिति
जिले में सक्रिय संस्थाएं
| संस्था | संख्या |
|---|---|
| स्वयं सहायता समूह | 44,290 |
| ग्राम संगठन | 3,200 |
| संकुल स्तरीय संघ | 69 |
| जुड़ी जीविका दीदियाँ | लगभग 6 लाख |
ग्रामीण महिलाओं के लिए बनी ताकत
ये संस्थाएं महिलाओं को बचत, ऋण, स्वरोजगार, कृषि, पशुपालन और सरकारी योजनाओं से जोड़ रही हैं।
जीविका के माध्यम से हजारों महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं और गांवों में सामाजिक परिवर्तन की नई मिसाल पेश कर रही हैं।

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