Minor Minerals Royalty & Ownership Fee | सुपौल में लघु खनिज रॉयल्टी और मालिकाना फीस पर समीक्षा बैठक
सुपौल, 16 मार्च 2026 – आज दिनांक 16.03.2026 को Shri Sawan Kumar, IAS, जिलाधिकारी, Supaul की अध्यक्षता में लघु खनिजों से संबंधित रॉयल्टी और मालिकाना फीस की कटौती पर समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई।
बैठक का उद्देश्य | Minor Minerals Royalty & Ownership Fee
बैठक का मुख्य उद्देश्य था:
- चयनित योजनाओं में उपयोग होने वाले लघु खनिजों की Royalty & Ownership Fee की समीक्षा।
- उपयोग और परिवहन के लिए चालान/परमिट की समर्पण प्रक्रिया का निर्देश।
- वित्तीय वर्ष 2025-26 की समाप्ति से पहले खनिजों की राशि की यथाशीघ्र कटौती और खनन शीर्ष में जमा करना।
जिलाधिकारी के निर्देश | Minor Minerals Royalty & Ownership Fee
जिलाधिकारी, श्री सावन कुमार ने बैठक में स्पष्ट कहा:
“विभिन्न विभागों/नगर निकायों को यह सुनिश्चित करना होगा कि चयनित योजना में उपयोग किए जा रहे लघु खनिजों का विवरण विभागीय निदेश के अनुसार समर्पित किया जाए। वित्तीय वर्ष समाप्त होने में कुछ ही दिन शेष हैं, अतः रॉयल्टी एवं मालिकाना फीस की राशि शीघ्र जमा करें।”
बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी | Minor Minerals Royalty & Ownership Fee
बैठक में कई महत्वपूर्ण अधिकारी उपस्थित रहे:
- खनिज विकास पदाधिकारी, Supaul
- कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग – Supaul / Triveniganj / Veerpur
- कार्यपालक अभियंता, पथ निर्माण विभाग, Supaul
- नगर निकायों के पदाधिकारी
- खान निरीक्षक, Supaul
बैठक में चर्चा के मुख्य बिंदु | Minor Minerals Royalty & Ownership Fee
- चयनित योजनाओं में उपयोग हो रहे Minor Minerals की पूरी जानकारी जमा कराना।
- चालान/परमिट के समर्पण की प्रक्रिया को तेज करना।
- रॉयल्टी और मालिकाना फीस की कटौती को वित्तीय वर्ष समाप्ति से पहले सुनिश्चित करना।
- विभागीय रिपोर्टिंग और निगरानी प्रणाली को मजबूत करना।
विभागीय कार्रवाई | Minor Minerals Royalty & Ownership Fee
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि:
- सभी विभाग अपनी योजना में उपयोग किए गए खनिजों का रिकॉर्ड तैयार करेंगे।
- चालान और परमिट को समय पर समर्पित किया जाएगा।
- रॉयल्टी और मालिकाना फीस की राशि खान शीर्ष में जमा करने की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाएगी
जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों को निर्देशित किया कि Royalty & Ownership Fee की कटौती और जमा में कोई देरी न हो। उन्होंने कहा कि यह कदम स्थानीय विकास योजनाओं के सुचारू कार्यान्वयन और खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।
“सुपौल जिले में खनिज संसाधनों का उचित प्रबंधन ही विकास का आधार है,” जिलाधिकारी ने जोर देते हुए कहा।
इस बैठक से यह स्पष्ट हुआ कि सुपौल जिले में Minor Minerals Management और वित्तीय पारदर्शिता को प्राथमिकता दी जा रही है। सभी विभागों को निर्देशित किया गया है कि वे वित्तीय वर्ष समाप्ति से पहले सभी शुल्क और रॉयल्टी जमा कराएँ।
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