Mithila Lok Utsav Ladania | भारत-नेपाल सीमा पर गूंजा मिथिला लोक उत्सव, संस्कृति संरक्षण का दिया संदेश
पिपराही में तीन दिवसीय आयोजन का भव्य शुभारंभ, लोकगीत और लोकनृत्य ने बांधा समां | Mithila Lok Utsav Ladania
लदनिया। भारत-नेपाल सीमा से सटे लदनिया प्रखंड के पिपराही गांव में तीन दिवसीय मिथिला लोक उत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। इस आयोजन का उद्देश्य मिथिला की समृद्ध लोक संस्कृति, लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक विरासत का संरक्षण और प्रचार-प्रसार करना है।
यह आयोजन आदर्श महिला मंडल लड़ुगामा की ओर से किया गया। कार्यक्रम को संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की कल्चर फंक्शन एंड प्रोडक्शन ग्रांट योजना के तहत सहयोग प्राप्त है।
डॉ. भारती मेहता ने किया उद्घाटन | Mithila Lok Utsav Ladania
कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार विधान परिषद की सदस्य डॉ. भारती मेहता ने किया।
उन्होंने कहा कि भारत-नेपाल सीमा पर स्थित मिथिला की पवित्र धरती पर इस तरह का आयोजन सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा देगा।
“लोककला, लोकगीत और लोकनृत्य हमारी पहचान हैं। इनके संरक्षण से आने वाली पीढ़ियां अपनी संस्कृति से जुड़ी रहेंगी।”
— डॉ. भारती मेहता
उन्होंने कहा कि यह उत्सव केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने का महत्वपूर्ण प्रयास है।
समाजसेवी राम कुमार राय ने किया स्वागत | Mithila Lok Utsav Ladania
कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत संबोधन से हुई।
समाजसेवी राम कुमार राय ने सभी अतिथियों और कलाकारों का स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि मिथिला की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत बनाने के लिए ऐसे आयोजन लगातार होने चाहिए।
कई जनप्रतिनिधि रहे मौजूद | Mithila Lok Utsav Ladania
उद्घाटन समारोह में अनेक जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने भाग लिया।
मुख्य रूप से उपस्थित रहे—
- सांसद प्रतिनिधि शिव कुमार
- प्रखंड प्रमुख सत्य नारायण सफी
- राजेश
- गंगाधर यादव
- स्थानीय गणमान्य नागरिक
- बड़ी संख्या में ग्रामीण और कला प्रेमी
मैथिली गीत से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ | Mithila Lok Utsav Ladania
पहले दिन की सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत रूपांजलि कुमारी और निर्मला कुमारी ने संयुक्त रूप से मैथिली स्वागत गीत प्रस्तुत कर की।
उनके गीत ने पूरे वातावरण को भक्तिमय और सांस्कृतिक रंग में रंग दिया।
इसके बाद एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
विद्यापति गीतों ने बांधा समां | Mithila Lok Utsav Ladania
शिवम मिश्रा ने प्रसिद्ध कवि विद्यापति के भक्ति गीत प्रस्तुत किए।
उन्होंने देवी और शिव की स्तुति से जुड़े कई पारंपरिक गीतों का गायन किया।
इसके साथ ही उन्होंने सामा-चकेवा, डोमकछ और झिझिया जैसी मिथिला की लोक परंपराओं पर आधारित प्रस्तुतियां भी दीं।
लोकगीतों पर झूमे दर्शक | Mithila Lok Utsav Ladania
रजनी झा ने देवी गीतों के साथ मिथिला की मधुर बोली और सांस्कृतिक गौरव को दर्शाने वाले गीत प्रस्तुत किए।
निर्मला कुमारी ने भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और सूफी परंपरा से जुड़े गीत गाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
रूपांजलि कुमारी ने मिथिला के लोकप्रिय लोकगीतों की शानदार प्रस्तुति दी।
दर्शकों ने हर प्रस्तुति का तालियों से स्वागत किया।
सूफी और गजल ने भी जीता दिल | Mithila Lok Utsav Ladania
विवेक वैरागी ने भक्ति और सूफी गायन से माहौल को आध्यात्मिक बना दिया।
उन्होंने कई लोकप्रिय रचनाओं की प्रस्तुति दी।
आनंद कुमार ठाकुर ने गजल गायन से कार्यक्रम में नई ऊर्जा भर दी।
उनकी प्रस्तुति को भी दर्शकों ने खूब सराहा।
संयुक्त प्रस्तुति बनी आकर्षण का केंद्र | Mithila Lok Utsav Ladania
शिवम मिश्रा और विवेक वैरागी ने संयुक्त रूप से लोकगीत प्रस्तुत किए।
उनकी प्रस्तुति के दौरान पूरा पंडाल तालियों की गूंज से भर उठा।
लोकधुनों पर उपस्थित लोग झूमते नजर आए।
वाद्य कलाकारों ने भी दिखाई प्रतिभा | Mithila Lok Utsav Ladania
संगीत को जीवंत बनाने में वाद्य कलाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
इन कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
| कलाकार | वाद्य यंत्र |
|---|---|
| राहुल मनीष | पैड |
| धीरज मिश्रा | तबला |
| शिवम ठाकुर | ढोलक |
| परमेश्वर ठाकुर | कीबोर्ड |
| नवीन कुमार | गिटार |
मंच संचालन और व्यवस्था रही आकर्षक | Mithila Lok Utsav Ladania
पूरे कार्यक्रम का संचालन मिथिलेश कुमार और उपेंद्र पासवान ने किया।
दोनों ने कार्यक्रम को व्यवस्थित और रोचक ढंग से आगे बढ़ाया।
कार्यक्रम की छायांकन व्यवस्था देवेंद्र कुमार और रामपूजन ने संभाली।

मिथिला की सांस्कृतिक विरासत को मिला नया मंच | Mithila Lok Utsav Ladania
इस आयोजन ने एक बार फिर साबित किया कि मिथिला की सांस्कृतिक पहचान आज भी लोगों के दिलों में जीवित है।
लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक प्रस्तुतियों ने नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का संदेश दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजन ग्रामीण संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में आयोजित यह उत्सव सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक बनकर उभरा।
आने वाले दो दिनों में भी कई प्रसिद्ध लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। आयोजकों को बड़ी संख्या में दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद है।






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