Patna Hearing Screening Program | पटना को मूक-बधिर मुक्त बनाने की बड़ी पहल, 78 बच्चों को मिली नई आवाज
जन्म से सुन नहीं पाने वाले बच्चों के लिए उम्मीद बनी श्रवण श्रुति योजना
पटना, 27 मई।
पटना जिला प्रशासन ने मूक-बधिर बच्चों के जीवन में नई रोशनी लाने की दिशा में बड़ी पहल की है। जिला पदाधिकारी ने स्पष्ट कहा है कि अब लक्ष्य केवल इलाज नहीं, बल्कि पूरे पटना जिले को मूक-बधिर मुक्त बनाना है।
पटना समाहरणालय में बुधवार को आयोजित विशेष कार्यक्रम में जिला पदाधिकारी ने उन बच्चों और उनके अभिभावकों से मुलाकात की, जिन्हें कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी के लिए कानपुर भेजा जा रहा है।
अभिभावकों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दे रही थी। कई माता-पिता भावुक भी नजर आए।
एक साल से कम समय में 78 बच्चों का उपचार | Patna Hearing Screening Program
जिला प्रशासन के अनुसार श्रवण श्रुति कार्यक्रम के तहत एक साल से भी कम समय में 78 बच्चों को उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
इन बच्चों को सुनने और बोलने की क्षमता लौटाने के लिए विशेष चिकित्सा सहायता दी जा रही है।
अब तक की उपलब्धियां
| विवरण | संख्या |
|---|---|
| कुल स्क्रीनिंग | 4,25,911 बच्चे |
| सुनने की समस्या वाले बच्चे | 1,747 |
| सामान्य उपचार से ठीक हुए बच्चे | 1,658 |
| कोक्लियर इम्प्लांट हेतु चिन्हित बच्चे | 89 |
| पहले उपचार पा चुके बच्चे | 53 |
| आज कानपुर भेजे गए बच्चे | 25 |
छोटे बच्चों ने सुनाई अपनी आवाज | Patna Hearing Screening Program
कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया जब कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी के बाद 4 से 5 साल के बच्चों ने जिला पदाधिकारी के सामने बोलकर दिखाया।
बच्चों ने “ए, बी, सी, डी” और “1, 2, 3” जैसे शब्द स्पष्ट रूप से बोले।
यह देखकर मौजूद अभिभावक भावुक हो गए।
जिलाधिकारी ने भी बच्चों में आए बदलाव पर खुशी जताई।
“हमारा लक्ष्य पटना जिला को मूक-बधिर मुक्त बनाना है।”
— जिलाधिकारी, पटना
क्या है श्रवण श्रुति कार्यक्रम | Patna Hearing Screening Program
यह योजना जन्मजात और कम उम्र में होने वाली श्रवण समस्या की पहचान और इलाज पर आधारित है।
इसका मुख्य उद्देश्य है:
- जल्दी पहचान
- सही जांच
- समय पर इलाज
- सर्जरी
- नियमित वाणी चिकित्सा
- सामाजिक पुनर्वास
यह योजना विशेष रूप से 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए चलाई जा रही है।
कम उम्र में पहचान बेहद जरूरी | Patna Hearing Screening Program
जिलाधिकारी ने कहा कि यदि कम उम्र में श्रवण समस्या की पहचान हो जाए तो बच्चा सामान्य बच्चों की तरह बोल सकता है।
उन्होंने कहा कि देरी होने पर नुकसान बढ़ जाता है।
प्रशासन ने दिए महत्वपूर्ण निर्देश
- हर बच्चे की समय पर जांच हो
- गांव स्तर तक जागरूकता बढ़े
- माता-पिता सक्रिय भूमिका निभाएं
- नियमित वाणी चिकित्सा सुनिश्चित हो
- कोई भी बच्चा इलाज से वंचित न रहे
विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े चिंताजनक | Patna Hearing Screening Program
जिलाधिकारी ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार देश में प्रति 1000 बच्चों में 5 से 8 बच्चे बधिर जन्म लेते हैं।
ऐसे में शुरुआती जांच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार दिव्यांग बच्चों को सम्मानजनक जीवन देने के लिए प्रतिबद्ध है।
कई विभाग मिलकर चला रहे अभियान | Patna Hearing Screening Program
इस अभियान को सफल बनाने के लिए कई विभाग संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं।
इनमें शामिल हैं
- स्वास्थ्य विभाग
- शिक्षा विभाग
- समाज कल्याण विभाग
- पंचायती राज विभाग
- ग्रामीण विकास विभाग
- जीविका समूह
- आईसीडीएस
- सिविल सोसायटी
जिलाधिकारी ने कहा कि सभी की सामूहिक भागीदारी से ही लक्ष्य हासिल होगा।
कानपुर में हो रही सफल सर्जरी | Patna Hearing Screening Program
कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी के लिए बच्चों को विभिन्न चरणों में कानपुर भेजा जा रहा है।
सभी बच्चों की सर्जरी सफल बताई गई है।
सर्जरी के बाद बच्चों की नियमित वाणी चिकित्सा भी कराई जा रही है।
बेहतर काम करने वाले कर्मियों का सम्मान | Patna Hearing Screening Program
कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले पांच अधिकारियों और कर्मियों को सम्मानित किया गया।
सम्मानित होने वालों में शामिल
- मसौढ़ी सीडीपीओ
- पालीगंज सीडीपीओ
- राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के चिकित्सक
- नोडल अधिकारी
- डाटा प्रविष्टि कर्मी
बच्चों को मिली नई जिंदगी | Patna Hearing Screening Program
जिलाधिकारी ने कहा कि यह केवल चिकित्सा योजना नहीं, बल्कि जीवन बदलने वाला अभियान है।
उन्होंने कहा कि इस योजना ने बच्चों को केवल सुनने की शक्ति नहीं दी, बल्कि उनके जीवन में नई उम्मीद और नई आवाज लौटाई है।
“आइए हम सब मिलकर सुनिश्चित करें कि कोई भी बच्चा पीछे न छूटे।”
— जिलाधिकारी, पटना



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