Patna Kalam Style Workshop Begusarai | बेगूसराय में पटना कलम शैली के नव सृजन कार्यशाला का शुभारंभ
बिहार की पारंपरिक कला को नई दिशा देने की पहल | Patna Kalam Style Workshop Begusarai
बेगूसराय।
कला एवं संस्कृति विभाग के तत्वावधान में बेगूसराय संग्रहालय परिसर में मंगलवार को “वर्तमान समय में पटना कलम शैली : नव सृजन” विषय पर दस दिवसीय कला कार्यशाला का शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन कला एवं संस्कृति पदाधिकारी श्री श्याम कुमार साहनी सहित वरिष्ठ कलाकारों और प्रशिक्षकों ने दीप प्रज्वलित कर किया।
इस अवसर पर कलाकारों ने कहा कि पटना कलम शैली बिहार की गौरवशाली कला परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके संरक्षण और विस्तार के लिए ऐसे आयोजनों की आवश्यकता है।

कलाकारों और विद्यार्थियों को मिलेगा प्रशिक्षण | Patna Kalam Style Workshop Begusarai
दस दिनों तक चलने वाली इस कार्यशाला में प्रतिभागियों को पटना कलम शैली की पारंपरिक विधाओं की जानकारी दी जाएगी।
साथ ही आधुनिक समय में इसके प्रयोगों पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कार्यशाला में कलाकारों, कला विद्यार्थियों और कला प्रेमियों को विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को चित्र निर्माण की बारीकियों से अवगत कराया जाएगा।
कार्यशाला की मुख्य बातें
- पटना कलम शैली की पारंपरिक तकनीकों का प्रशिक्षण
- कला निर्माण की आधुनिक विधियों की जानकारी
- विशेषज्ञ कलाकारों द्वारा व्यावहारिक मार्गदर्शन
- बिहार की कला विरासत के संरक्षण पर चर्चा
- नई पीढ़ी को कला परंपरा से जोड़ने का प्रयास

बिहार की पहचान है पटना कलम शैली | Patna Kalam Style Workshop Begusarai
पटना कलम शैली भारतीय चित्रकला की विशिष्ट पहचान मानी जाती है।
इस शैली में स्थानीय जीवन, प्रकृति और सामाजिक परिवेश को कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
आयोजकों का उद्देश्य इस कला शैली को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और इसके प्रति रुचि बढ़ाना है।
कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को परंपरा और नवीनता के बीच संतुलन बनाने का अवसर मिलेगा।
कला संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा | Patna Kalam Style Workshop Begusarai
अधिकारियों ने बताया कि ऐसी कार्यशालाएं कलाकारों को अपनी प्रतिभा निखारने का मंच देती हैं।
साथ ही स्थानीय कला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में भी सहायता करती हैं।
पटना कलम शैली को आगे बढ़ाने के लिए युवा कलाकारों की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस दस दिवसीय आयोजन से बिहार की सांस्कृतिक विरासत को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

0 Comments