Rural School Infrastructure Development | एक व्यक्ति ने बदल दी शिक्षा की तस्वीर

Rural School Infrastructure Development | भड़ला गांव में 13 साल बाद स्कूल भवन तैयार। समाजसेवी अंबाराम परमार के संघर्ष से बच्चों को मिला शिक्षा का स्थायी आधार।


Rural School Infrastructure Development | 13 साल बाद गांव को मिला स्कूल भवन

भड़ला में शिक्षा संघर्ष की जीत | Rural School Infrastructure Development

नागदा क्षेत्र के भड़ला गांव में 13 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद शासकीय प्राथमिक विद्यालय का भवन बनकर तैयार हो गया है। यह केवल एक भवन नहीं, बल्कि संघर्ष, संकल्प और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल बन गया है। वरिष्ठ समाजसेवी अंबाराम परमार के अथक प्रयासों के कारण आज गांव के बच्चों को शिक्षा के लिए अपना स्थायी ठिकाना मिल सका है।

13 साल तक बिना भवन के चला स्कूल | Rural School Infrastructure Development

भड़ला गांव का प्राथमिक विद्यालय वर्षों तक भवन विहीन रहा।

बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर थे।

कभी गर्मी, कभी बारिश, तो कभी कड़ाके की ठंड में शिक्षा जारी रही।

यह स्थिति ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की बड़ी चुनौती को दर्शाती है।

Rural School Infrastructure Development

अंबाराम परमार का संघर्ष बना मिसाल | Rural School Infrastructure Development

समाजसेवी अंबाराम परमार ने इस समस्या को व्यक्तिगत जिम्मेदारी की तरह लिया।

उन्होंने लगातार प्रशासन को पत्र लिखे।

कई अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाई।

लेकिन लंबे समय तक कोई समाधान नहीं मिला।

“संघर्ष लंबा था, लेकिन लक्ष्य बच्चों का भविष्य था।”


भूख हड़ताल से प्रशासन झुका | Rural School Infrastructure Development

वर्ष 2018 में अंबाराम परमार ने भूख हड़ताल शुरू की।

यह हड़ताल 5 दिनों तक चली।

इसमें स्थानीय युवाओं और जनप्रतिनिधियों का समर्थन मिला।

आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा।

लिखित आश्वासन दिया गया कि स्कूल की व्यवस्था की जाएगी।

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झोपड़ी से शुरू हुई पढ़ाई | Rural School Infrastructure Development

जब जमीन नहीं मिली, तो परमार ने अपने खेत की मेड़ पर झोपड़ी बनाकर स्कूल चलाने का प्रस्ताव दिया।

2013 से स्कूल उनके आंगन में संचालित होता रहा।

यह पहल ग्रामीण शिक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।


पदयात्रा ने बदली तस्वीर | Rural School Infrastructure Development

स्कूल निर्माण के लिए परमार ने दो बड़ी पदयात्राएं कीं:

  • पहली यात्रा: 15 किलोमीटर, भड़ला से नागदा
  • दूसरी यात्रा: 90 किलोमीटर, भड़ला से उज्जैन

इन यात्राओं ने प्रशासन का ध्यान खींचा।

आखिरकार भवन निर्माण के लिए राशि स्वीकृत हुई।


निर्माण प्रक्रिया और वर्तमान स्थिति | Rural School Infrastructure Development

चरणस्थिति
भूमि चयनपूर्ण
राशि स्वीकृतिपूर्ण
निर्माण कार्यअंतिम चरण
संचालन प्रारंभइस वर्ष

अब भवन तैयार है और जल्द ही बच्चों को इसका लाभ मिलेगा।

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तीसरी पदयात्रा की चेतावनी का असर | Rural School Infrastructure Development

जब निर्माण में देरी हुई, तो तीसरी पदयात्रा की चेतावनी दी गई।

इससे प्रशासन तुरंत सक्रिय हुआ।

बाकी राशि जारी की गई।

निर्माण कार्य तेजी से पूरा हुआ।


ग्रामीण शिक्षा के लिए प्रेरणा | Rural School Infrastructure Development

यह कहानी बताती है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो बदलाव संभव है।

भड़ला का यह विद्यालय अब अन्य गांवों के लिए उदाहरण बन गया है।


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