Thaka Batohi Book Launch | पिण्डारूच में ‘थका बटोही’ पुस्तक का विमोचन, विद्वानों ने लेखक की जीवन यात्रा को बताया प्रेरणादायक

Thaka Batohi Book Launch | अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति धरणीधर झा ने किया पुस्तक का लोकार्पण, रतिकान्त सदन में साहित्यकारों और गणमान्यों का लगा जमावड़ा
पिण्डारूच, दरभंगा। केवटी प्रखंड के पिण्डारूच गांव में शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को साहित्यिक वातावरण के बीच पुस्तक विमोचन समारोह का आयोजन किया गया। रतिकान्त सदन परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में अवकाश प्राप्त न्यायाधीश रुक्मिणी कांत चौधरी द्वारा लिखित पुस्तक ‘थका बटोही’ का विमोचन पटना उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति धरणीधर झा के कर-कमलों से संपन्न हुआ।
इस अवसर पर क्षेत्र के साहित्यिक जगत के अनेक प्रखर विद्वान, गणमान्य व्यक्ति और साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे। समारोह में पुस्तक के लेखक की जीवन यात्रा, उनके अनुभवों और साहित्यिक अभिव्यक्ति को लेकर वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पिण्डारूच के पूर्व सरपंच एवं वयोवृद्ध शिवकांत झा ने की। वहीं, आकाशवाणी के प्रख्यात व्यक्तित्व मणिकांत झा भी मंचासीन रहे। साहित्य, संस्कृति और सामाजिक जीवन से जुड़े व्यक्तित्वों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।

वेदोच्चारण के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ | Thaka Batohi Book Launch
पुस्तक विमोचन समारोह का आरंभ अवकाश प्राप्त लेफ्टिनेंट पंडित मणिनाथ मिश्रा द्वारा वेदोच्चारण के साथ किया गया। वैदिक मंत्रों की गूंज के बीच कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत हुई।
इसके बाद फिल्म अभिनेता नवीन चौधरी ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। उन्होंने उपस्थित अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के आयोजन और पुस्तक विमोचन के महत्व पर प्रकाश डाला।
स्वागत भाषण के बाद पुस्तक ‘थका बटोही’ का विमोचन किया गया। मंच पर उपस्थित अतिथियों और विद्वानों की मौजूदगी में पुस्तक के लोकार्पण का क्षण समारोह का प्रमुख आकर्षण रहा।

जीवन के अनुभवों और संस्मरणों पर आधारित है पुस्तक | Thaka Batohi Book Launch
पुस्तक विमोचन के पश्चात लेखक रुक्मिणी कांत चौधरी ने अपने संबोधन में पुस्तक की रचना प्रक्रिया और उसके विषयवस्तु के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि ‘थका बटोही’ उनकी जीवन यात्रा के संस्मरणों पर आधारित पुस्तक है। इसमें उनके व्यक्तिगत जीवन के विभिन्न आयामों को समाहित किया गया है।
लेखक के अनुसार, पुस्तक में जीवन के अनुभवों और यात्रा के विभिन्न पड़ावों को अभिव्यक्ति देने का प्रयास किया गया है।
उनकी जीवन यात्रा से जुड़े प्रसंग पुस्तक को व्यक्तिगत अनुभवों का दस्तावेज बनाते हैं। इसमें जीवन के विभिन्न पक्षों को शब्दों के माध्यम से सामने लाने की कोशिश की गई है।
पुस्तक के माध्यम से लेखक ने अपने अनुभवों को पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया है। ऐसे संस्मरण पाठकों को किसी व्यक्ति के जीवन संघर्ष, अनुभव और विचारों से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

न्यायमूर्ति धरणीधर झा ने जताया पिण्डारूच आने का संतोष | Thaka Batohi Book Launch
समारोह के मुख्य अतिथि अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति धरणीधर झा ने अपने वक्तव्य में लेखक रुक्मिणी कांत चौधरी के प्रति आत्मीयता व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि वे श्री चौधरी को अपना ज्येष्ठ भ्राता मानते हैं। उनसे उन्हें अपार स्नेह मिलता रहा है।
न्यायमूर्ति धरणीधर झा ने बताया कि उनकी दिली इच्छा थी कि वे पिण्डारूच गांव आएं। पुस्तक विमोचन के अवसर पर इस गांव में उपस्थित होना उनके लिए विशेष अनुभव रहा।
उन्होंने कहा कि विद्वानों की इस भूमि पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर वे गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
उनके वक्तव्य में लेखक के प्रति सम्मान और पिण्डारूच की साहित्यिक परंपरा के प्रति आत्मीयता स्पष्ट दिखाई दी।

अध्यक्ष ने बताया लेखक की जीवन यात्रा को प्रेरणादायक | Thaka Batohi Book Launch
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वयोवृद्ध शिवकांत झा ने अपने उद्बोधन में लेखक की जीवन यात्रा को प्रेरणादायक बताया।
उन्होंने कहा कि रुक्मिणी कांत चौधरी का जीवन अनुभवों से भरा हुआ है। उनकी जीवन यात्रा से पाठकों को अनेक महत्वपूर्ण बातें सीखने का अवसर मिलेगा।
अध्यक्ष ने विश्वास व्यक्त किया कि पुस्तक में प्रत्येक शब्द ऐसा होगा, जो पाठकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
उनके अनुसार, जीवन के अनुभवों को साहित्य के माध्यम से प्रस्तुत करना समाज के लिए उपयोगी कार्य है। ऐसी पुस्तकें पाठकों को जीवन के विभिन्न पक्षों को समझने और अनुभवों से सीखने का अवसर प्रदान करती हैं।

साहित्यिक विद्वानों ने रखे अपने विचार | Thaka Batohi Book Launch
पुस्तक विमोचन समारोह के दौरान उपस्थित अन्य विद्वानों ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
वक्ताओं ने पुस्तक, लेखक की जीवन यात्रा और संस्मरण साहित्य के महत्व पर चर्चा की।
समारोह में साहित्यिक अभिव्यक्ति के साथ-साथ व्यक्तिगत अनुभवों को लिखित रूप में सुरक्षित रखने की परंपरा पर भी विचार सामने आए।
पिण्डारूच जैसे गांव में साहित्यिक आयोजन का होना स्थानीय सांस्कृतिक वातावरण के लिए महत्वपूर्ण माना गया।
कार्यक्रम में उपस्थित साहित्य प्रेमियों और गणमान्य व्यक्तियों ने पुस्तक विमोचन के अवसर को आत्मीयता के साथ साझा किया।

मणिकांत चौधरी ने संभाला मंच संचालन | Thaka Batohi Book Launch
कार्यक्रम के दौरान मंच संचालन की जिम्मेदारी मणिकांत चौधरी ने संभाली।
उन्होंने समारोह के विभिन्न चरणों को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाया। अतिथियों के वक्तव्य और पुस्तक विमोचन की प्रक्रिया के बीच कार्यक्रम का संचालन किया गया।
कार्यक्रम के अंत में ललित चौधरी ने उपस्थित अतिथियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन किया।
उन्होंने समारोह में शामिल होने वाले सभी विद्वानों, गणमान्य व्यक्तियों और साहित्य प्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

स्वाती और श्वेता ने किया आयोजन | Thaka Batohi Book Launch
इस पुस्तक विमोचन समारोह की आयोजक लेखक रुक्मिणी कांत चौधरी की दौहित्रीद्वय स्वाती एवं श्वेता थीं।
वहीं, आयोजन की जिम्मेदारी ज्ञानेश चौधरी ने संभाली।
कार्यक्रम में स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों के साथ-साथ मीडियाकर्मी भी उपस्थित रहे।
रतिकान्त सदन परिसर में आयोजित इस समारोह ने पिण्डारूच में साहित्यिक गतिविधियों को एक नया अवसर प्रदान किया।
पुस्तक ‘थका बटोही’ के विमोचन के साथ लेखक की जीवन यात्रा और उनके अनुभवों को पाठकों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सामने आया।
समारोह में व्यक्त विचारों से यह संदेश उभरकर आया कि जीवन के अनुभवों को साहित्य के रूप में संजोना आने वाली पीढ़ियों के लिए उपयोगी हो सकता है।
पिण्डारूच की साहित्यिक भूमि पर आयोजित यह कार्यक्रम पुस्तक, लेखक और साहित्यिक संवाद के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर बना।

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