Private Hospital Deaths | निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत, परिजनों का हंगामा
कुशीनगर, उ.प्र.: जिले में अवैध अस्पतालों पर कार्रवाई के प्रशासनिक दावे एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। कुशीनगर के नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र के कोटवा में स्थित खुशी हॉस्पिटल में प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत ने पूरे इलाके में तनाव बढ़ा दिया है।
घटना का विवरण | Private Hospital Deaths
मठिया बुजुर्ग निवासी निलेश ने अपनी पत्नी नितू को प्रसव पीड़ा होने पर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र खड्डा पहुँचाया।
- डॉक्टरों ने गंभीर हालत देखते हुए जिला अस्पताल रेफर किया।
- परिजन जिला अस्पताल न जाकर कोटवा स्थित खुशी हॉस्पिटल पहुँचे।
- अस्पताल में प्रसव से पहले पैसे जमा करवाने की बात कही जा रही है।
दर्दनाक परिणाम | Private Hospital Deaths
- प्रसव के दौरान नवजात बच्ची की मौत हो गई।
- प्रसूता की हालत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया।
- जिला अस्पताल पहुँचने पर डॉक्टरों ने प्रसूता को मृत घोषित किया।
परिजनों का आरोप | Private Hospital Deaths
परिजन अस्पताल संचालक की लापरवाही और अमानवीय व्यवहार पर गुस्सा व्यक्त कर रहे हैं।
- मृत नवजात को दवा के डिब्बे में रखकर अस्पताल के बाहर छोड़ने का आरोप।
- अस्पताल संचालक घटना के बाद मौके से फरार हो गया।
“हमारी बेटी और पत्नी दोनों एक ही दिन में खो दी। यह अमानवीयता किसी भी हद से परे है।”
– पीड़ित पति, निलेश
प्रशासनिक कार्रवाई | Private Hospital Deaths
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची।
- दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
- जिलाधिकारी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच के बाद अस्पताल को सील किया।
- एसडीएम खड्डा ने घटनास्थल का निरीक्षण कर कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया।
| कार्रवाई | विवरण |
|---|---|
| पुलिस | शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा |
| स्वास्थ्य विभाग | अस्पताल को सील किया और जांच शुरू |
| एसडीएम खड्डा | निरीक्षण कर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन |
सवाल और चुनौती | Private Hospital Deaths
कुशीनगर में अवैध अस्पतालों की स्थिति अब भी चिंताजनक है।
- गरीब और भोले-भाले लोग इन अस्पतालों के जाल में फंस रहे हैं।
- लाखों की मेहनत और अपनों की जान जोखिम में है।
“अवैध अस्पतालों पर प्रभावी कार्रवाई कब होगी, यह सबसे बड़ा सवाल है।”
– स्थानीय नागरिक
यह घटना न केवल निजी अस्पताल में सुरक्षा और नैतिकता की कमी को उजागर करती है, बल्कि प्रशासनिक कार्रवाई की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़ा करती है। कुशीनगर जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने और अवैध अस्पतालों पर सख्त निगरानी की आवश्यकता अब और अधिक स्पष्ट हो गई है।
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